Procrastination (टालमटोल) को कैसे तोड़ें? एक 5-स्टेप प्लान।

आलसी नहीं हैं, बस गलत सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। आइए, इसे एक इंजीनियर की तरह ठीक करें।

नमस्ते,

आज हम उस चिपचिपे राक्षस की बात करेंगे जो हम सबके अंदर कहीं न कहीं छिपा बैठा है। उसका नाम है – टालमटोल (Procrastination)।

यह एक ऐसा मीठा ज़हर है जो ‘मैं यह काम कल करूँगा’ कहकर आज का सुकून तो देता है, लेकिन हमारे कल के आत्मविश्वास और भविष्य को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। यह जानता है कि आपके सपने बड़े हैं, यह जानता है कि आप सक्षम हैं, इसीलिए यह आपको शुरू ही नहीं करने देता।

हम में से ज़्यादातर लोग इस राक्षस से इच्छाशक्ति (Willpower) के दम पर लड़ने की कोशिश करते हैं, और हार जाते हैं। क्यों? क्योंकि इच्छाशक्ति एक बैटरी की तरह है जो दिन भर में खत्म हो जाती है।

एक स्टोरी इंजीनियर के तौर पर, हम इससे लड़ेंगे नहीं। हम इसे इंजीनियर करेंगे। हम इसकी मशीनरी को समझेंगे और एक ऐसा नया, बेहतर सिस्टम बनाएँगे जो टालमटोल को अपने आप हरा दे।

यह है उस नए सिस्टम को बनाने का 5-स्टेप ब्लूप्रिंट।

स्टेप 1: समस्या की इंजीनियरिंग – अपने ‘क्यों’ को समझें

कोई भी इंजीनियर किसी मशीन को ठीक करने से पहले यह पता लगाता है कि वह खराब क्यों हुई। टालमटोल सिर्फ़ आलस नहीं है। यह एक लक्षण है, बीमारी नहीं। असली बीमारी है – डर।

ज़्यादातर हम तीन तरह के डर की वजह से टालमटोल करते हैं:

 * असफलता का डर (Fear of Failure): “अगर मैंने कोशिश की और मैं हार गया तो? इससे तो अच्छा है कि मैं शुरू ही न करूँ।”

 * सफलता का डर (Fear of Success): “अगर मैं सफल हो गया, तो लोगों की उम्मीदें बढ़ जाएँगी। क्या मैं उस दबाव को झेल पाऊँगा?”

 * पूर्ण न होने का डर (Fear of Imperfection): “मैं इस काम को परफेक्ट तरीके से नहीं कर सकता, इसलिए इसे करने का कोई फायदा नहीं है।”

आपका आज का काम: एक कागज़ और कलम लें। पूरी ईमानदारी से लिखें कि आप जिस काम को टाल रहे हैं, उसके पीछे इन तीनों में से कौन सा डर छिपा है। अपने डर को एक नाम दें। उसे स्वीकार करें। यह निदान (Diagnosis) का पहला और सबसे ज़रूरी कदम है।

स्टेप 2: लक्ष्य की इंजीनियरिंग – इसे हास्यास्पद रूप से छोटा बनाएँ

एक बार जब हमें समस्या पता चल जाती है, तो हम एक नया, छोटा और सरल डिज़ाइन बनाते हैं। हमारा दिमाग बड़े, मुश्किल कामों को देखकर घबरा जाता है और उन्हें टाल देता है। तो हम उसे धोखा देंगे। हम अपने लक्ष्य को इतना छोटा कर देंगे कि हमारे दिमाग को लगे कि “अरे, यह तो बहुत आसान है!”

इसे ‘दो-मिनट का नियम’ कहते हैं।

आपका आज का काम: अपने सबसे बड़े काम को एक ऐसे छोटे हिस्से में तोड़ें जिसे करने में दो मिनट से भी कम लगें।

 * बड़ा लक्ष्य: मुझे एक किताब लिखनी है।

   * छोटा लक्ष्य: आज एक चैप्टर लिखूँगा। (नहीं, यह अभी भी बड़ा है)

   * हास्यास्पद छोटा लक्ष्य: आज सिर्फ़ लैपटॉप खोलकर, वर्ड फाइल को एक नाम दूँगा और पहला वाक्य लिखूँगा। (हाँ, यह सही है!)

 * बड़ा लक्ष्य: मुझे पूरा घर साफ़ करना है।

   * छोटा लक्ष्य: आज सिर्फ़ अपना कमरा साफ़ करूँगा। (नहीं, यह भी बड़ा है)

   * हास्यास्पद छोटा लक्ष्य: आज सिर्फ़ अपनी कुर्सी पर पड़े कपड़ों को उठाकर अलमारी में रखूँगा। (हाँ, यह परफेक्ट है!)

जब आप शुरुआत को इतना आसान बना देते हैं, तो दिमाग के पास टालने का कोई बहाना नहीं बचता।

स्टेप 3: शुरुआत की इंजीनियरिंग – 5-सेकंड का नियम लागू करें

अब हमारे पास एक सरल डिज़ाइन है। अब मशीन को चालू करने (Ignite) का समय है। हमारे दिमाग में एक विचार और उस पर एक्शन लेने के बीच बस 5 सेकंड की एक छोटी सी खिड़की होती है। अगर हमने उस 5 सेकंड में एक्शन नहीं लिया, तो हमारा दिमाग उस विचार को मार देता है और बहाने बनाना शुरू कर देता है।

आपका आज का काम: जैसे ही आपके मन में अपने ‘हास्यास्पद छोटे लक्ष्य’ को करने का विचार आए, तुरंत 5 से उल्टी गिनती गिनें और एक्शन लें।

 * विचार: “मुझे अपनी कुर्सी पर पड़े कपड़े उठा देने चाहिए।”

 * आपका एक्शन: “5… 4… 3… 2… 1… GO!” और शारीरिक रूप से उठकर कपड़ों की तरफ बढ़ जाएँ।

सोचिए मत। बहस मत कीजिए। बस 5 सेकंड के अंदर हिलना शुरू कर दीजिए। यह आपके दिमाग के बहाने बनाने वाले सिस्टम को बायपास कर देता है।

स्टेप 4: गति की इंजीनियरिंग – एक चेन बनाएँ

एक इंजीनियर जानता है कि गति (Momentum) सबसे बड़ी ताकत है। एक बार जब कोई चीज़ चल पड़ती है, तो उसे चलाते रखना आसान होता है।

आपका आज का काम: एक कैलेंडर लें। जिस भी दिन आप अपना ‘दो-मिनट का काम’ पूरा कर लें, उस तारीख पर एक बड़ा सा लाल ‘X’ लगा दें। दूसरे दिन फिर से करें और एक और ‘X’ लगाएँ। कुछ दिनों में आपको ‘X’ की एक चेन बनती हुई दिखाई देगी।

अब आपका एकमात्र लक्ष्य है – इस चेन को तोड़ना नहीं है।

आपका ध्यान अब उस बड़े, डरावने लक्ष्य से हटकर, हर दिन उस कैलेंडर पर बस एक और ‘X’ लगाने पर केंद्रित हो जाएगा। यह दृश्य प्रमाण (visual proof) आपको अविश्वसनीय रूप से प्रेरित करेगा।

स्टेप 5: इनाम की इंजीनियरिंग – डोपामाइन का इस्तेमाल करें

हर अच्छी मशीन को चलते रहने के लिए एक सकारात्मक फीडबैक लूप की ज़रूरत होती है। हमारे दिमाग के लिए, यह फीडबैक ‘इनाम’ से मिलता है। जब हम कोई काम करते हैं और हमें तुरंत इनाम मिलता है, तो हमारा दिमाग (डोपामाइन छोड़कर) कहता है, “यह अच्छा था! चलो इसे दोबारा करते हैं।”

आपका आज का काम: अपना ‘दो-मिनट का काम’ पूरा करने के तुरंत बाद खुद को एक छोटा सा, मज़ेदार इनाम दें।

 * उदाहरण:

   * 15 मिनट पढ़ने के बाद → अपनी पसंदीदा चाय का एक कप।

   * एक ज़रूरी ईमेल भेजने के बाद → 5 मिनट के लिए अपना पसंदीदा गाना सुनना।

   * कपड़े अलमारी में रखने के बाद → 2 मिनट के लिए सोशल मीडिया देखना।

इनाम को तत्काल और सुखद होना चाहिए। यह आपके दिमाग में उस काम और खुशी के बीच एक मज़बूत रिश्ता बनाता है, जिससे अगली बार उस काम को शुरू करना और भी आसान हो जाता है।

निष्कर्ष

टालमटोल कोई चारित्रिक दोष नहीं है; यह सिर्फ़ एक गलत प्रोग्रामिंग है। आप अपनी आदतों के इंजीनियर हैं।

 * समझें कि आप क्यों टाल रहे हैं।

 * काम को छोटा करें।

 * 5 सेकंड में शुरू करें।

 * चेन बनाकर जारी रखें।

 * खुद को इनाम दें।

इन औज़ारों का इस्तेमाल करें और अपनी टालमटोल की पुरानी, जर्जर मशीन को एक उत्पादक (productive) और शक्तिशाली इंजन में बदल दें।

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