क्यों लिखी मैंने ‘इंजीनियर साहब’? एक कहानी जो आपके दिल में उम्मीद जगा देगी

नमस्ते दोस्तों, हमारे देश में ‘रिजल्ट का दिन’ किसी त्योहार या मातम से कम नहीं होता। उस एक दिन, मार्कशीट के कुछ अंक यह तय कर देते हैं कि आप ‘होनहार’ हैं या ‘नाकारा’। पड़ोसियों की आँखों में आपके लिए सम्मान होगा या उपहास। मैंने अपने आस-पास कई युवाओं को इस दबाव में टूटते, बिखरते…