‘अविवाहित माँ’ – सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना

हम सब सपने देखते हैं। कुछ अपनी आँखों में, कुछ अपनी डायरी के पन्नों में, तो कुछ अपने मन के किसी शांत कोने में। लेकिन क्या कभी हमने सोचा है कि उन सपनों की असली क़ीमत क्या होती है? ख़ासकर तब, जब आप एक लड़की हों और आपका जन्म भारत के किसी छोटे से गाँव में हुआ हो, जहाँ आज भी सपनों को परंपरा और समाज की तराज़ू पर तौला जाता है।

इन्हीं सवालों के बीच आपको ले जाती है हाल ही में प्रकाशित हुई एक दिल को झकझोर देने वाली किताब—”अविवाहित माँ”, जिसका उपशीर्षक है “क्षण भर का सुख”।

कौन है पार्थी?

लेकिन यहीं कहानी एक ऐसा मोड़ लेती है, जो पार्थी की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल देता है। मोहब्बत के नाम पर मिला धोखा और “क्षण भर का सुख” उसे शोहरत की चकाचौंध के पीछे छिपे एक ऐसे अंधेरे में धकेल देता है, जहाँ वह बिल्कुल अकेली खड़ी थी।

यह कहानी है रामपुर की पार्थी की। एक ऐसी लड़की जिसकी आवाज़ में कोयल की मिठास थी और आँखों में ‘राइजिंग रत्ना’ बनने का जुनून। ग़रीबी और एक बीमार पिता की लाचारी के बावजूद, वह अपनी कला के दम पर उस दुनिया को जीत लेना चाहती थी, जिसने उसे हमेशा कमज़ोर समझा। अपने परिवार के त्याग को अपनी ताक़त बनाकर जब वह सपनों के शहर मुंबई पहुँचती है, तो ज़िंदगी उसे वो सब कुछ देने का वादा करती है जिसका उसने हमेशा ख़्वाब देखा था—शोहरत, सम्मान और प्यार।

क्यों पढ़ें यह किताब?

“अविवाहित माँ” सिर्फ़ एक लड़की के संघर्ष की कहानी नहीं है। यह हमारे समाज का एक कड़वा सच बयां करती है।

 * यह समाज के दोहरे चरित्र को दिखाती है: यह उपन्यास उस समाज पर एक तीखा प्रहार है जो एक लड़की की सफलता पर तो जश्न मनाता है, लेकिन उसके एक ग़लत क़दम पर उसे ज़लील करने में ज़रा भी देर नहीं लगाता। आप पढ़ेंगे कि कैसे पार्थी को सिर पर बिठाने वाले लोग ही उसे कीचड़ में घसीटने लगते हैं।

 * यह प्यार और धोखे को परिभाषित करती है: यह कहानी प्यार के उस मासूम रूप को दिखाती है जो पार्थी के दिल में था, और उस धोखे को भी, जो साहिल जैसे किरदारों की फ़ितरत में होता है। यह सवाल करती है कि क्यों हमेशा एक रिश्ते की ग़लती का बोझ सिर्फ़ औरत को ही उठाना पड़ता है?

 * यह मातृत्व को एक नई दृष्टि देती है: जब समाज पार्थी को ‘गर्भवती’ और ‘चरित्रहीन’ कहकर उस पर लांछन लगाता है, तब वह इसी पहचान को अपनी सबसे बड़ी ताक़त बना लेती है। उसका ‘अविवाहित माँ’ बनने का संकल्प समाज के मुँह पर एक तमाचा है। यह मातृत्व का वह रूप है, जो पवित्रता के सामाजिक प्रमाण-पत्रों का मोहताज नहीं।

निष्कर्ष

यह कहानी आपको रोने पर मजबूर करेगी, समाज की सोच पर गुस्सा दिलाएगी, और अंत में, पार्थी की हिम्मत को सलाम करने पर विवश कर देगी। यह उन सभी के लिए है जो कभी न कभी अपने सपनों के लिए लड़े हैं, जिन्होंने कभी अन्याय सहा है, और जो यह मानते हैं कि इंसान अपनी तक़दीर ख़ुद लिख सकता है।

पार्थी की इस अविस्मरणीय और प्रेरणादायक यात्रा का हिस्सा बनने के लिए, आज ही इस किताब को पढ़ें।

“अविवाहित माँ” अब अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।

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